पटना | बिहार की सियासत में साल 2026 चुनावी गहमागहमी का साल होने वाला है। बिहार विधान परिषद की कुल 20 सीटों पर होने वाले चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। इनमें विधानसभा कोटे की 11 महत्वपूर्ण सीटों के साथ-साथ शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें भी शामिल हैं। इस चुनाव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे दिग्गजों की साख दांव पर होगी।


विधानसभा कोटा: 11 सीटों का गणित

विधानसभा कोटे की 11 सीटों में से 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं, जबकि 2 सीटों पर उपचुनाव की स्थिति है।

  • उपचुनाव: भाजपा नेता मंगल पांडे के विधानसभा जाने से खाली हुई सीट पर चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं, नीतीश कुमार की खाली सीट के लिए तारीखों का इंतजार है। माना जा रहा है कि ये सीटें क्रमशः भाजपा और जदयू के खाते में ही रहेंगी।

  • सीटों का बंटवारा: संख्या बल के हिसाब से 9 सीटों में से 7 पर भाजपा-जदयू का कब्जा रह सकता है, जबकि महागठबंधन (राजद/कांग्रेस) को 1 सीट और चिराग पासवान की लोजपा (आर) को भी 1 सीट मिलने की उम्मीद है।


28 जून को इन दिग्गजों की होगी 'विदाई'

आगामी 28 जून को विधानसभा कोटे के 9 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नाम शामिल हैं:

  • जदयू: डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, भीष्म सहनी और भगवान सिंह कुशवाहा।

  • भाजपा: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय प्रकाश।

  • विपक्ष: राजद के डॉ. सुनील कुमार सिंह, मो. फारुक और कांग्रेस के डॉ. समीर कुमार सिंह।


शिक्षक और स्नातक निर्वाचन: प्रतिष्ठा की लड़ाई

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है क्योंकि यहाँ दलों से ज्यादा उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि मायने रखती है।

  • शिक्षक निर्वाचन: प्रो. नवल किशोर यादव (पटना), अफाक अहमद (सारण), प्रो. संजय कुमार सिंह (तिरहुत) और डॉ. मदन मोहन झा (दरभंगा) का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है।

  • स्नातक निर्वाचन: पटना से नीरज कुमार (जदयू), वंशीधर ब्रजवासी (तिरहुत), सर्वेश कुमार (दरभंगा) और डॉ. एनके यादव (कोसी) की सीटों पर 16 नवंबर को कार्यकाल पूरा होगा।

  • उपचुनाव: भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय निकाय सीट के लिए 12 मई को मतदान होना तय है।


2027 की तैयारी: मनोनयन कोटे पर नजर

साल 2026 की इन चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक दलों की नजरें मार्च 2027 पर भी हैं, जब मनोनयन कोटे की 12 सीटें खाली होंगी। इनमें अशोक चौधरी, संजय सिंह (जदयू) और जनक राम, देवेश कुमार (भाजपा) जैसे कद्दावर नेताओं का कार्यकाल पूरा होगा।