जबलपुर: रांझी क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। क्लीरेंस उर्फ राजा एटकिंस की हत्या के मुख्य सूत्रधार विकास नेल्सन उर्फ बाबा ईसाई की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस खूनी खेल की गहरी कड़ियों को सुलझाने में जुटी है। जांच में इस हत्याकांड के तार अंतरराज्यीय हथियार तस्करों और जेल में बंद गिरोहों से जुड़े होने के प्रबल संकेत मिले हैं।


खूनी संघर्ष की जड़: 15 एकड़ जमीन का विवाद

पुलिस जांच के अनुसार, यह वारदात किसी तात्कालिक आवेश का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी।

  • विवाद की वजह: रायपुर स्थित 15 एकड़ कृषि भूमि के सौदे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। इसी रंजिश के चलते आरोपी ने हत्या की साजिश रची।

  • वारदात का तरीका: राजा एटकिंस पर उस वक्त हमला किया गया जब वह अपने 5 वर्षीय मासूम बेटे को स्कूल छोड़कर घर लौट रहा था। घात लगाए बैठे बाइक सवार हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर उसे मौत के घाट उतार दिया।


जेल कनेक्शन और अवैध हथियारों का नेटवर्क

आरोपियों के आपराधिक इतिहास ने पुलिस को कुछ गंभीर सुराग दिए हैं:

  1. जेल में बनी योजना: आशंका जताई जा रही है कि इस हत्याकांड की रूपरेखा जेल के भीतर सक्रिय अपराधियों के साथ मिलकर तैयार की गई थी।

  2. हथियार तस्करी: बाबा ईसाई के पिछले कुछ महीनों के संपर्कों से पता चला है कि वह अवैध हथियार तस्करों के संपर्क में था। पुलिस अब उस 'चेन' को खोजने में जुटी है जिसने वारदात के लिए हथियार उपलब्ध कराए।

  3. धमकी भरा वीडियो कॉल: जांच में यह भी सामने आया है कि छिंदवाड़ा के दो युवकों ने वीडियो कॉल के जरिए राजा को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसमें बाबा के बेटे प्रिंस द्वारा गोली मरवाने की बात कही गई थी।


फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी

पुलिस ने अब तक इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्त में ले लिया है, लेकिन मुख्य आरोपी बाबा ईसाई का बेटा प्रिंस नेल्सन और साथी अर्पित कुशवाहा अब भी फरार हैं।

  • पुलिस की रणनीति: फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं जो संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

  • वित्तीय जांच: पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और हालिया वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए कहीं से फंडिंग तो नहीं की गई थी।